Tuesday, May 5, 2015

Headphone




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उसकी आवाज़ अभी भी मुझ में गूंजती है 

ठीक वैसे ही जैसे हैडफ़ोन लगा के आवाज़ें 

कानों में ही नहीं बल्कि 
सर, हलक और ज़हन में भी सुनाई देती हैं 
कुछ इस तरह  मानो जैसे कि 
कोई मुझे ही में बैठ कर गा रहा हो 
और फ़क़त साज़ कानों में बजते हैं 
आवाज़ का साथ निभाने को 
उसकी आवाज़ भी मुझ में अब तक वैसे ही गूंजती है 
झंकार बीट सी हंसी, गहरी सांसों के बास और चिचिड़ाहट का ट्रेबल... 
मेरे सर की मालिश के दौरान को तबला बजाता था 
वो कानों में सुनाई पड़ता है और उसके गुनगुनाने की बांसुरी! 
उस बांसुरी की कम्पन मेरे होठों पर महसूस होती है अब भी 
एक उसकी आवाज़ है जो मेरे हलक से उठती है 
और रूह तक उसका अलाप सुनाई देता है 
इन यादों के हैडफ़ोन की खामोशियाँ  कितनी ससुरीली हैं ना!
सच! कुछ तरानों को रिकॉर्ड करने को ज़रुरत नहीं पड़ती 

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