कुछ बीतता नहीं कभी भी....
बस यादों की परतों पर परतें चढ़ती जाती हैं|
जैसे टेप-रिकार्डर में रील पर रील चढ़ती जाती है....
ज़िन्दगी के टेप-रिकार्डर में दरअसल,
रीवायिंड या फॉरवर्ड का बटन ही मिस्सिंग है!
बस प्ले और स्टॉप है पॉज भी नहीं है नामुराद सा!
चलो उंगली या पेंसिल डाल कर घुमा कर देखें....
बीते पल का फिर प्ले होते हैं! होते तो नहीं?

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