Wednesday, October 24, 2012

दूरियां


इस काली काली रात में 
इक आधा आधा चाँद है 
अधूरी सी कुछ बातें हैं 
कुछ पूरी सूरी रातें हैं
कुछ अनकहे से किस्से हैं
जो तेरे मेरे हिस्से हैं  
कुछ लम्बी लम्बी सासें हैं 
कुछ फ़ैली फ़ैली बाहें हैं 
इक छुअन है इसमें जादू जादू 
इक धड़कन भी है कुछ बेकाबू 
कुछ झुकती उठती पलकें हैं 
कुछ लम्हे बीते कल के हैं 
दूरियां हैं दुआएं भी हैं 
शक शुभे शुआयें भी हैं 
कुछ सुख दुःख हैं जो बांटे हैं 
कुछ गहरे रिश्ते नाते हैं 
इक इश्क है जूनून के जैसा 
और अश्क है सुकून के जैसा 
ये आधा आधा चाँद ना जानम 
ये काली काली रात ए हमदम 
वही सब ही तो दोहराती है 
घिसी पिटी सी बात है पर सच है 
कि दूरियां ही तो प्यार बढ़ाती हैं 

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