इस काली काली रात में
इक आधा आधा चाँद है
अधूरी सी कुछ बातें हैं
कुछ पूरी सूरी रातें हैं
कुछ अनकहे से किस्से हैं
जो तेरे मेरे हिस्से हैं
कुछ लम्बी लम्बी सासें हैं
कुछ फ़ैली फ़ैली बाहें हैं
इक छुअन है इसमें जादू जादू
इक धड़कन भी है कुछ बेकाबू
कुछ झुकती उठती पलकें हैं
कुछ लम्हे बीते कल के हैं
दूरियां हैं दुआएं भी हैं
शक शुभे शुआयें भी हैं
कुछ सुख दुःख हैं जो बांटे हैं
कुछ गहरे रिश्ते नाते हैं
इक इश्क है जूनून के जैसा
और अश्क है सुकून के जैसा
ये आधा आधा चाँद ना जानम
ये काली काली रात ए हमदम
वही सब ही तो दोहराती है
घिसी पिटी सी बात है पर सच है
कि दूरियां ही तो प्यार बढ़ाती हैं

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