घर से निकलो तो ज़रा सोच के चलो
नयी दुनिया को क्या बताओगे?
किस गली के बाशिंदे हो तुम
किस शहर का नाम बताओगे?
घर की याद आने पर क्या
नुक्कड़ के किस्से सुनाओगे?
या फिर झेंप कर किसी कोने में
तन्हा आँसू बहाओगे?
चलो परदेस की छोड़ो
वहाँ तो वक़्त 4जी से भी तेज़ ग ुज़र जाएगा
कोई दोस्त ना भी बना अगर तो
'सिरी' से बातें करते दिन बीत ह ी जाएगा
पर लौटते वक़्त ये सोच के आना
के घर वापिस क्या क्या लाओगे?
स्मार्टफॉन लॅपटॉप 3डी टीवी छो ड़ो
मैं जानता हूँ कि तुम अदद ओ वु सत में
कभी भी मात नहीं खाओगे...
(आख़िर परदेस गये इसीलिए तो थे! )
पर इतना बताओ के इन सब में
तुम सिफ़त में क्या कमाओगे?
तानों को साल दर साल डब्बों भरो गे क्या?
के इस घर जैसा मेरा घर कतई कभी हो नहीं सकता?
के मेरे घर के लोग इस क़दर ज़ही न हों ऐसा हो नहीं सकता?
के मेरे हालात यहाँ जैसे घर में भी हों ये हो नहीं सकता?
के मैं कितना भी चाहूं कुछ करूँ मगर कुछ हो नहीं सकता?
या फिर कुछ उम्मीदें कुछ वादे क ुछ पुरज़ोर मुकम्मल कोशिशें ला ओगे?
कुछ 'प्लान' बनाओगे या फिर कुछ 'ब्लूप्रिंट्स' के हाशिए खींच क े लाओगे?
के जैसे घर की छत को ठीक यहाँ क रते हैं
मेरे घर में क्यूँ ना हो?(कोशिश करने में क्या हर्ज है?)
के जैसी ज़िंदगी यहाँ जीते हैं खुशनुमा सी हसीन
मेरे घर में वही समा मुकाबिल क् यूँ ना हो?
अच्छा चलो छोड़ो ये तुम्हारे लि ए बेफिसूल क़ी बातें
सुनो..एक वॅक्यूम क्लीनर ही ले आना बबुआ... हॅंडस्फ्री वाला
सॉफ सफाई करने को ….. घर अपना च मकाने को..
आस पड़ोस देखेगा जब घर तो
पूछेंगे ही के कहाँ से लाए...
तब बतलाना तुम कुछ किस्से
के बदलाब को कैसे लायें..
क्या पता कोई 'फॉलो' या 'लाइक' ही कर ले
(ट्विटर या फ़ेसबुक के जैसे)
एक से चार की 'मार्केटिंग' हो ज ाए….
शायद बदलाव फॅशन स्टेट्मेंट बन जाए..…
तो भैया सोच समझ कर वापिस अइयो. .
काई सवाल ताक पर होंगे
घर की इज़्ज़त की बात है प्यारे
काई जवाब आँच पर होंगे
घर आओ तो ज़रा सोच कर ही आना…

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