एँवे ही
एँवे ही के रिश्ते नाते एँवे ही तो हम तुम हैं....
एँवे ही इक दिल है मोया .. एँवे ही जो गुम सुम है...
एँवे ही का हँसना रोना एँवे ही के सब ग़म हैं..
कुछ ख़ास नही है मुझमें जो कि एँवे ही कोई गुरूर करूँ..
कुछ बात नही है मुझमें जो कि एँवे ही कोई फितूर रखूं...
एँवे ही दुनिया में हूँ मैं.... एँवे ही सी बात करूँ...
एँवे ही नाराज़ रहूं मैं... एँवे ही फरियाद करूँ...
एँवे ही जीते जीते फिर एँवे ही मर जाऊँगी...

1 comment:
Beautiful composition!
कितनी आसानी से आपने कह दिया "एवे ही" .. :) कितना सरल है गहरी बातों को दो शब्दों में बयां करना एवे ही :) ..
One of my favorites! :)
Regards,
Megha.
P.S. You have got a follower! :) .. Loved your blog.
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