Tuesday, October 21, 2008

आधा अधूरा चाँद


ये आधा अधूरा चाँद आपको अच्छा लगता है?
बादल कितने अच्छे लग रहे हैं ना और ये आसमान...
आपको बादल अच्छे लग रहे है या आसमान या चाँद?.........
उस रात मैं चाँद को घंटो ताकती रही थी..
उलझन में तुम खूब अच्छे से डालना जानते हो ना..
रात भर सोचती रही..चाँद..बादल..या आसमान..
सच कहूँ तो शायाद कुछ भी नहीं...
ऐसे नज़ारे, शायद इससे भी बेहतर देखे हैं मैंने..
पर खूबसूरत तो सब तुम्हारे साथ ही लगते हैं...

२९-०६-२००७

5 comments:

गौतम राजऋषि said...

ब्लौग के नाम ने घसीटा यहाँ और बस डूब ही गया फिर इन उमड़ते खयालों की बुनाई ने बाँधे रखा.बहुत बढिया....मजा अ गया

kunalc said...

khubsurat to hai....bohot....

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाहवा
अच्छा कहा
साधुवाद

नीरज गोस्वामी said...

ऐसे नज़ारे, शायद इससे भी बेहतर देखे हैं मैंने..
पर खूबसूरत तो सब तुम्हारे साथ ही लगते हैं...
वाह...बहुत अच्छी और सच्ची बात...
घटायें धूप बारिश फूल तितली चांदनी "नीरज"
इन्ही में दिल करे जब भी, तुझे मैं देख आता हूँ
नीरज

pallavi trivedi said...

bahut badhiya....