ये आधा अधूरा चाँद आपको अच्छा लगता है?
बादल कितने अच्छे लग रहे हैं ना और ये आसमान...
आपको बादल अच्छे लग रहे है या आसमान या चाँद?.........
उस रात मैं चाँद को घंटो ताकती रही थी..
उलझन में तुम खूब अच्छे से डालना जानते हो ना..
रात भर सोचती रही..चाँद..बादल..या आसमान..
सच कहूँ तो शायाद कुछ भी नहीं...
ऐसे नज़ारे, शायद इससे भी बेहतर देखे हैं मैंने..
पर खूबसूरत तो सब तुम्हारे साथ ही लगते हैं...
बादल कितने अच्छे लग रहे हैं ना और ये आसमान...
आपको बादल अच्छे लग रहे है या आसमान या चाँद?.........
उस रात मैं चाँद को घंटो ताकती रही थी..
उलझन में तुम खूब अच्छे से डालना जानते हो ना..
रात भर सोचती रही..चाँद..बादल..या आसमान..
सच कहूँ तो शायाद कुछ भी नहीं...
ऐसे नज़ारे, शायद इससे भी बेहतर देखे हैं मैंने..
पर खूबसूरत तो सब तुम्हारे साथ ही लगते हैं...
२९-०६-२००७
5 comments:
ब्लौग के नाम ने घसीटा यहाँ और बस डूब ही गया फिर इन उमड़ते खयालों की बुनाई ने बाँधे रखा.बहुत बढिया....मजा अ गया
khubsurat to hai....bohot....
वाहवा
अच्छा कहा
साधुवाद
ऐसे नज़ारे, शायद इससे भी बेहतर देखे हैं मैंने..
पर खूबसूरत तो सब तुम्हारे साथ ही लगते हैं...
वाह...बहुत अच्छी और सच्ची बात...
घटायें धूप बारिश फूल तितली चांदनी "नीरज"
इन्ही में दिल करे जब भी, तुझे मैं देख आता हूँ
नीरज
bahut badhiya....
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