Monday, July 28, 2008

गिटलीघुम

गिटलीघुम गिटलीघुम गिटलीघुम
आओ सारे साथ मिलके बादलों पे चलते हैं
वो बड़ा सा छेद मिलके फूलों से ही भरते हैं
प्यारा सा मौसम रहेगा हर दम
चिलचिलाती गर्मी में क्यूँ मरें हम तुम
गिटलीघुम गिटलीघुम गिटलीघुम
आओ चलें हम वो वाले किले में
काला से धुंए में पानी भरेंगे
चलके बुझाते हैं आग जो लगी है
खांसता खांसते क्यूँ निकले दम
गिटलीघुम गिटलीघुम गिटलीघुम
आओ चलो हम बाँटें खुशी
सबके चेहरों पे नाचे हँसी
अच्छे बच्चे बनके रहे हम
क्यूँ रहे यहाँ कोई गुम सुम
गिटलीघुम गिटलीघुम गिटलीघुम

1 comment:

डॉ .अनुराग said...

मुस्करा दिया हूँ,,,.