Saturday, May 31, 2008

नाम


मैने सवाल करना छोड़ दिया है
हर बात पर क्यूँ कहना
हर बात का कारण जानने की कोशिश
अब इनमें कुछ नही करती
इस खुजली की खुरचन से
ये सब सवाल पैरों में बहुत चुभते थे
आँखों में ख़टकते थे और
दिल को ज़ख़्मी कर देते थे
तुम मुझे क्यों नही मिले
वो क्यों नहीं हुआ जो होना चाहिए था
ये जो हुआ वो क्यों हुआ॥
क्या कारण था इसका
तुमने जो किया वो क्या सही था?
अगर सही था तो मुझे ग़लत क्यों लगता है
ऐसे कितने ही सवाल मैंने कई मर्तबा किए थे ख़ुद से
और फिर ज़ख्मी पडी रही थी कई रोज़ खुदी की ज़मीं पर
और कोfirst aid भी करने नहीं आया था
अब सवाल नही पूछती
जो जैसा है उसको वैसे ही रहने दो ना
कम से कम सब गूबार दबा तो रहता है
ऊपर से सब ठीक ठाक लगता है तो
ज़िंदगी भी आराम से चल पाती है
लडखडाती नही है ....
लेकिन तुम एक काम न किया करो please...
मुझे मेरे नाम से मत पुकारा करो...
तुमसे उम्मीदें हो जाती हैं...
कई सवालों का जवाब मिल जाता है
उनका भी जो कभी उठे ही नहीं .......
मुझे अपने होने के.. या अपने नाम के मायने नहीं जानने
कुछ बातों को तुम 'hmmmm' करके ही बयान कर दिया करते हो
तो अच्छा रहता है ........
एक इंतज़ार तो रहता है कि शायद कभी बिना पूछे ही तुम सब कह डालो!!




3 comments:

डॉ .अनुराग said...

ये सब सवाल पैरों में बहुत चुभते थे
आँखों में ख़टकते थे और
aor ye line....
बातों को तुम 'hmmmm' करके ही बयान कर दिया करते हो
तो अच्छा रहता है ........
एक इंतज़ार तो रहता है कि शायद कभी बिना पूछे ही तुम सब कह डालो

bahut kuch kah jata hai.....bahut kuch.

Shreya said...

ispar comment karne ka mann nhi kar raha.... ye personal lag raha hai...aur sweet heart dil ki baat mein to kabhi kami hoti hi nahi naa...paak aur sachhi :)

Unknown said...

how natural n true these lines are