Thursday, March 13, 2014

Khwaab





ख्वाब दिखाओ मुझे वो फिल्मों वाला 
थोडा sci-fi सा हो किसी और ही सय्यार  में
हज़ारों light years दूर किसी अजनबी सी दुनिया में
हम  तुम मिलें किसी सिराज को ढूंढते
मेरे सिराज की  रौशनी में तुम और
तुम्हारे की  रौशनी में मैं तुम्हें यूं दिखूं कि बस
देखते ही इश्क़ हो जाए एक दूसरे से
या मैं किसी चाँद से डोंगे में छुप कर किसी एलियन से बच रही होऊं
और तुम पानी की  तलाश में मुझे ही ढूंढ लो
न एलियन फिर हमें ढूंढ पाये और न ही
फिर पानी की चाह रह जाए
एक दूसरे के दीदों के दरिया में हम  तुम न डूबें और न पार लगें
क्या खूब हो न के सात आठ चाँद की  चाँदनी में नहाये हम
बस खोये हो एक दूजे में और कहीं से पानी के फव्वारे बरस पड़ें
इश्क़ ओ हुस्न ओ माह ओ शम्स  कुछ यूँ भीग जाएँ के
रूह की  हर प्यास भुझ जाए ....गले तक तर जाए
बस इतना हो और मेरी नींद खुल जाए
तुम अपने भीगे बाल मेरे चेहरे पे झटको और
मेरी सुस्ताई खोयी नज़रें देख कर मुझसे पूछो
सोना! कोई सपना देखा क्या?
मैं मुस्कुराऊं और तुम्हारी बाहों में सिमटे फिर सो जाऊं
और तुम मुझे फिर कोई सपना दिखाओ वो फिल्मों वाला
इस बार नया मंज़र और नयी दास्ताँ का 

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