ची ची चिडिया जायेगी कहाँ पे
फुर्र फुर्र करके उडेगी कहाँ पे
बहार तो रास्ता मिलेगा नही
पेड़ हरा सा दिखेगा नही
तिनके बिचारी लायेगी कहाँ से
घर वो बेचारी बनाएगी कहाँ पे
उंची उंची ये बिल्डिंग है
आसमान तक लिफ्ट लगी है
चिडिया को बोलो लिफ्ट में आए
आसमान पे वो घर बनाए
बदल का तिनका बिजली की लाईटें
चंदा के बर्तन सूरज पे कुकिंग
बारिश हुई तो छुपेगी कहाँ पे
खेलने को शाम को जायेगी कहाँ पे
बड़ा सा लॉन है टेरेस पे देखो
ज़मीन कही भी दिखती नही देखो
ये घर नही बस सीढी ही सीढी है
बड़ी सी सुरंग में कीडी ही कीडी है
कीडी से इंसां बनाएगी कहाँ से
कारपेट की घास फूस लाएगी कहाँ से
पिंजरे में चिडिया बोर हो जाती है
घर ही में रह के उदास हो जाती है
बड़ा सा पार्क हो, थोडी थोडी घास हो
ये सब मिले तो खुश हो जाती है
फूल मिलें तो जायेगी कहाँ पे
संग संग सबके खेलेगी वहाँ पे
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