Tuesday, August 7, 2012

फुर्सत





फुर्सत जमा किया करो तुम 
पैसों में आखिर रखा ही क्या है
इक शाम बस प्यार से इक दूजे को ताकें
रात का खाना तो ऐवेंही बच जाएगा 

प्यार में ताकत बहुत है जानम
खपत बचत में बदल देता है
२ मील हाथ थामे चल लें अगर हम
टैक्सी का खर्चा तो ऐवेंही बच जाएगा 

इक थाल में इक दूजे कों खिलायें
इक दूजे के हाथ में पानी पियें हम
बस मुस्कान की मिश्री हो और
बोसों की चाशनी में डूब जाएँ
बत्तियां बुझा कर दिल रौशन कर
बैठें रात भर छत पर हम
ए सी बल्ब विम फ्रिज टी वी और मोबाइल 
इस सब से पीछा तो ऐवेंही छुट जाएगा 

बाहों के जो हार पहना दो 
प्यार से सर पर हाथ फिरा दो 
आलिंगन की साड़ी ओढा दो 
दो बोल प्यार के गर जो सुना दो
सारी मुश्किलें आसां होंगी तब 
शौपिंग के बिल से निजात मिलेगी
हर मसला तो ऐवेंही हल हो जाएगा 

बस फुर्सत जमा किया करो तुम 
पैसों में आखिर रखा ही क्या है

1 comment:

Savi said...

बस फुर्सत जमा किया करो तुम
पैसों में आखिर रखा ही क्या है


Bahot Khoob...