फुर्सत जमा किया करो तुम
पैसों में आखिर रखा ही क्या है
इक शाम बस प्यार से इक दूजे को ताकें
रात का खाना तो ऐवेंही बच जाएगा
प्यार में ताकत बहुत है जानम
खपत बचत में बदल देता है
२ मील हाथ थामे चल लें अगर हम
टैक्सी का खर्चा तो ऐवेंही बच जाएगा
इक थाल में इक दूजे कों खिलायें
इक दूजे के हाथ में पानी पियें हम
बस मुस्कान की मिश्री हो और
बोसों की चाशनी में डूब जाएँ
बत्तियां बुझा कर दिल रौशन कर
बैठें रात भर छत पर हम
ए सी बल्ब विम फ्रिज टी वी और मोबाइल
इस सब से पीछा तो ऐवेंही छुट जाएगा
बाहों के जो हार पहना दो
प्यार से सर पर हाथ फिरा दो
आलिंगन की साड़ी ओढा दो
दो बोल प्यार के गर जो सुना दो
सारी मुश्किलें आसां होंगी तब
शौपिंग के बिल से निजात मिलेगी
हर मसला तो ऐवेंही हल हो जाएगा
बस फुर्सत जमा किया करो तुम
पैसों में आखिर रखा ही क्या है
1 comment:
बस फुर्सत जमा किया करो तुम
पैसों में आखिर रखा ही क्या है
Bahot Khoob...
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