Tuesday, August 25, 2009

बस कुछ देर


सोने दो न कुछ और देर मुझे
सीने पे सर यूँ ही रहने दो न
और कंधे पर से हाथ न हटाओ
बस यूँ ही ऐसे ही रहने दो

रहने दो जी....
दो उंगलियाँ थक जायेंगी
इनको मुझपे यूँ न चलाओ
बस इन्हें उँगलियों से खेलने दो न
गुत्थम गुत्थी करते हुए

गुनगुनाते हो तो गुनगुनाते रहो न
मेरा नाम लेके जगाओ न तुम
कोई बात वात नही करनी है
तुम्हारी धड़कनें सुनने दो न
बस कुछ और देर सोने दो मुझे

न! मैं नहीं लाती चाय बना के
न तुम कोई और बहाना करना
उलझी उलझी साँसे हैं जो
उनमें कोई खलिश न पैदा करना
सुकून तुम्हें भी तो मिलता ही है
मुझे समेट के बाहों में
तो कुछ और देर सोने दो न मुझे

न आंखें खोलने कों कहो
न ही करवट लेना तुम
जो पल थमा हुआ है अभी इस वक़्त
बस उसी कों चलने दो तुम
खुद जागे हो तो फिर सो जाओ न
और मुझे भी सोने दो
बस कुछ देर और..